अजवायन के आयुर्वेदिक घरेलू उपचार

घरेलू औषधि के रूप में अजवायन का उपयोग प्राचीनकाल से होता आ रहा है. अजवायन गैस, कफ, अपच, दस्त, पेचिश और जुकाम जैसे कई रोगों से राहत देती है. अजवायन स्त्रियों के लिए बहुत लाभदायक है. प्रसूता स्त्री को अजवायन खिलाने से उसकी पाचन-क्रिया मजबूत होती है, मां के स्तन में दूध अधिक आता है. अजवायन योनि विकारों को दूर करने में भी सहायक है.

पेट दर्द
पेट में दर्द हो तो अजवायन को गुड़ के साथ खाकर ऊपर से पानी पीएं. इससे पेट के दर्द से राहत मिलती है. इसी तरह अजवायन, काला नमक तथा हींग तीनों को पीसकर रख लेंं. जब भी पेट में दर्द हो तब एक ग्राम चूर्ण दिन में दो बार गर्म पानी के साथ लें, तुरंत आराम मिलेगा.

कमर दर्द
100 ग्राम अजवायन का चूर्ण और 100 ग्राम गुड़ दोनों को एक साथ मिलाकर रख लें. 5 से 7 ग्राम चूर्ण सुबह-शाम सेवन करने से कमर का दर्द दूर होता है.

गैस
भोजन करने के बाद पेट में गैस बनने की शिकायत हो, पेट में भारीपन हो, खट्टी डकारें आती हों या पेट में गुड़गुड़ाहट हो तो तीन ग्राम अजवायन और दो ग्राम खाने के सोडा की फंकी लेकर ऊपर से दो-चार घूंट गर्म पानी पीएं. दोनों समय भोजन करने के दस मिनट बाद यह प्रयोग करने से उपरोक्त सभी शिकायतें दूर हो जाती हैं.

सर्दी-जुकाम-खांसी
सर्दी, जुकाम, खांसी में पान में अजवायन डालकर खाने से सर्दी और खांसी से राहत मिलती है.

पेट के कीड़े
चार माशा अजवायन के चूर्ण को छांछ में मिलाकर सेवन करने से पेट के कीड़े नष्ट हो जाते हैं.

बुखार
15 ग्राम अजवायन को किसी मिट्टी के बर्तन में एक कप पानी डालकर उसमें भिगो दें और छत पर रख दें. सुबह छानकर यह पानी पी जाएं. ऐसा नियमित एक सप्ताह करने से बुखार खत्म हो जाता है और शरीर में बढ़ी हुई गर्मी शांत हो जाती है. इससे रक्त की भी शुद्धि होती है.

गले में दर्द
यदि गले में दर्द हो तो अजवायन के पानी से बार-बार कुल्ले करें. इससे तुरंत राहत मिलेगी.

शिशु को दस्त
छोटे शिशुओं को प्रायः हरे-पीले दस्त की शिकायत हो जाती है. इस व्याधि पर मां के दूध में दो से चार रत्ती स्वच्छ अजवायन का महीन चूर्ण दिन में तीन बार दें. इससे शिशु की दस्त की शिकायत दूर हो जाती है और वह शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करता है.

गैस
पेट में गैस की शिकायत होने पर चार ग्राम अजवायन और एक ग्राम काला नमक गर्म पानी से सेवन करना फायदेमंद है. आंख की फूलीः अजवायन को जलाकर और उसे पीसकर कपड़छान चूर्ण बनाएं. आंखों में फूली पड़ जाने पर इस चूर्ण को जस्ता की सलाई से आंखों में लगाएं. एक सप्ताह तक सुबह-शाम ऐसा करने से निःसंदेह फूली कट जाती है.

पीरियड्स प्रोब्लम्स (मासिक समस्या)
महिलाओं में मासिक अवरोध हो जाने पर पुराने गुड़ और अजवायन का काढ़ा पीने से गर्भाशय का मल साफ हो जाता है प्रतिदिन सुबह-शाम दो बार सेवन करना चाहिए.

श्‍वेत प्रदर
50 ग्राम चूने के पानी में 4 ग्राम अजवायन रात को भिगो दें. सुबह उसे हाथ से अच्छी तरह मसलकर छानकर पीएं. ऐसा कुछ दिनों तक करने से स्त्रियों का श्‍वेत प्रदर की समस्या से राहत मिलती है.

प्रसूता स्त्री के लिए लाभकारी
प्रसूता स्त्रियों को अजवायन देने से उन्हें भूख लगती है. अन्न पचता है तथा कमर का दर्द भी दूर हो जाता है.

कब्ज
अजवायन का काढ़ा पीने से कब्ज की शिकायत दीर होती है और आंतों में सड़न नहीं होती.

दमा
दमा रोग में अजवायन की गर्म पुल्टिस से रोगी के सीने पर सेंक करने से लाभ होता है.

अजवायन के विशेष नुस्ख़े
• 200 ग्राम अजवायन को अच्छी तरह साफ कर धो लें, ताकि उसमें मिट्टी न रहे. फिर इसे सुखा लें. सूख जाने पर उसे किसी कांच के जार में रखकर उससे कुछ ऊपर तक नींबू का रस भर दें. इस पात्र को खुला ही धूप में तब तक रहने दें जब तक नींबू का रस न सूख जाए. इसी प्रकार 7 बार नींबू का रस डाल-डाल कर सुखाएं. अंतिम (सातवीं) बार थोड़ा काला नमक भी पीसकर नींबू रस के साथ डाल दें. सूख जाने पर सुरक्षित रख लें और 3-4 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करें. इससे सभी प्रकार के पेट के रोग दूर हो जाते हैं. साथ ही यह पुरुषत्व को भी बढ़ाता है.
• अजवायन में एक प्रकार का सुगंधयुक्त उड़नशील तेल होता है जिसे अजवायन का फूल, अजवायन सत्व तथा अंग्रेजी में थायमोल कहते हैं. 10 ग्राम पिपरमेंट तथा 20 ग्राम देशी कपूर में 10 ग्राम अजवायन सत्व मिलाकर एक कड़ी डाट वाली शीशी में तीनों को डालकर बंद कर दें. कुछ समय बाद तीनों चीज़ें पिघल कर लिक्विड का रूप ले लेंगी. यह एक अमृत तुल्य औषधि है. इसे अपने पास हमेशा रखें. यह सभी प्रकार की पीड़ा को दूर करती है. दांत दर्द, पेट दर्द, कान दर्द, पसली का दर्द, छाती एवं कमर की पीड़ा, सिर दर्द आदि पर तुरंत लाभ करने वाली यह एक लाभकारी औषधि है. इसे फाहे से लगाइए. कुछ बूंदें मलिए या फिर चार-छह बूंद चीनी या बताशे में रखकर खिला दीजिए. हैजा, दस्त, जी मिचलाना, उल्टी, श्‍वास, खांसी तथा विषैले बिच्छू, ततैया आदि के काटने पर निःसंकोच इसका प्रयोग किया जा सकता है.

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