श्री हरिदास!!

अतीतानागता भावा ये च वर्तन्ति साम्प्रतम् । तान् कालनिर्मितान् बुध्वा न संज्ञां हातुमर्हसि ॥

सृष्टि में जो भी पदार्थ पूर्व में थे, भविष्य में होंगे और वर्तमान में हैं, वे सब काल द्वारा निर्मित हैं इस तथ्य को समझते हुए तुम्हें (श्रोता) अपना संज्ञान-सामर्थ्य अथवा विवेक नहीं खोना चाहिए ।

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