कमाई आ ही जाती है।

गुज़ारे भर को ईमां से कमाई आ ही जाती है
अगर इफ़रात हो दौलत, बुराई आ ही जाती है

ये माना झूठ का दुनिया में कारोबार फैला है
लबों पे फित्रतन मेरे सच्चाई आ ही जाती है

अगर पकवान हों महँगे, ये शक्कर फाँक लेते हैं
ज़ुबां पर मुफ़लिसों के यूँ मिठाई आ ही जाती है

यहाँ हर शख्स फ़ानी है सभी हैं जानते लेकिन
जुदा हो गर कोई अपना रुलाई आ ही जाती है

ख़ुदा ने खोल रक्खे हैं जहां में इश्क़ के मक्तब
सभी को यूँ मोहब्बत की पढ़ाई आ ही जाती है

जवानी करती है मन की ये कुनबा फिर भी कायम है
बुज़ुर्गों में तो सहने की समाई आ ही जाती है

बहुत कमियां मेरे एह्बाब में है, लोग कहते हैं
मेरे अशआर में उनकी बड़ाई आ ही जाती है

अदा बस फ़र्ज़ ही करना यहाँ उम्मीद रखने से
क़रीबी रिश्तों में भी कुछ खटाई आ ही जाती है

रवादारी के जज़्बे से जो कोई काम करता है
दुआएँ मुफ़्त मिलती हैं, बधाई आ ही जाती है

अभी इस जिस्म से सबको ज़रूरी काम लेने हैं
हमारे नाश्ते के संग दवाई आ ही जाती है

ऐ ज़ाहिद माफ़ करना हम तुझे अब सुन न पाएंगे
अगर तक़रीर हो लंबी जम्हाई आ ही जाती है

अदावत की ये आतिश तो जलाकर ख़ाक करती है
मुहब्बत की हरारत से भलाई आ ही जाती है

करेगा वो मदद अपनी यक़ीनन कह नही सकते
इबादत से मगर दिल में सफाई आ ही जाती है

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