🌹🌹गुलाब के गुण और उससे होने वाले आयुर्वेदिक इलाज

घरेलू आयुर्वेदिक उपचार💊💉*
●▬▬▬▬▬▬♧ॐ♧▬▬▬▬▬▬●

🌹🌹गुलाब के गुण और उससे होने वाले आयुर्वेदिक इलाज

●▬▬▬▬▬▬♧ॐ♧▬▬▬▬▬▬●

परिचय

गुलाब की खुबसूरती के कारण से गुलाब को फूलों का राजा कहा जाता है। गुलाब एक ऐसा फूल है जिसके बारे में सब जानते हैं। पूरे भारत में गुलाब के पौधे लगाए जाते हैं। देशी गुलाब लाल रंग का होता है। गुलाब के द्वारा बनाएं जाने वाले दो पदार्थ अधिक प्रसिद्ध हैं एक तो गुलकंद और दूसरा गुलाबजल।
गुलाब की अनेक किस्में पाई जाती हैं जिन पर कई रंगों के फूल खिलते हैं। लगभग गुलाब के पौधे की ऊंचाई 120-180 सेंटीमीटर तक होता है। इसके तने में कुछ असमान कांटे लगे होते हैं। गुलाब के तनों में 5 पत्तियां मिली हुई लगी होती है। गुलाबी रंग का गुलाब का फूल अधिक मात्रा में होता है तथा इसके अलावा गुलाब के फूल सफेद तथा पीले रंग के भी होते हैं। गुलाब का फल अंडाकार होता है। मार्च-अप्रैल के महीने में इसके फूल खिलते हैं। इसके फूलों से इत्र व गुलकंद बनाया जाता है।

गुण
गुलाब का उपयोग करने से दिल, दिमाग और आमाशय की शक्ति में वृद्धि होती है जिसके फलस्वरूप इनकी क्रिया भी ठीक प्रकार से होने लगती है। गर्मी से होने वाले उन्माद रोग को ठीक करने के लिए गुलाब का उपयोग करना लाभदायक होता है। यह मन के प्रसन्न करता है तथा पाचन शक्ति की क्रिया को ठीक करता है।

हानिकारक प्रभाव

गुलाब का अधिक मात्रा में सुघंने से जुकाम हो सकता है।

गुलाब के फूल का ज्यादा मात्रा मे सेवन करने से संभोग करने की शक्ति में कमजोरी आती है।

जिन रोगियों का पेशाब करने की नली कमजोर हो उन्हें गुलकंद का सेवन नहीं करना चाहिये क्योंकि इससे उन्हें अधिक हानि हो सकती है।

विभिन्न रोगों में उपचार

होंठों का कालापन:

गुलाब की पंखुड़ियों को पीसकर उसमें थोड़ा सा ग्लिसरीन अच्छी तरह से मिला लें और इसे दिन में 3-4 बार होठों पर लगाएं इससे होंठों का कालापन दूर होता है।

गुलाब के एक फूल को पीसकर उसमें थोड़ी सी मलाई मिला लें, फिर इसे 10 मिनट तक होंठों पर लगायें इसके बाद होंठों को धो दें। कुछ दिनों तक इस प्रकार से उपचार करने पर होंठों का कालापन दूर हो जाएगा।

गुलाब की पंखुड़ियों को पीसकर उसमें थोड़ी सी ग्लिसरीन मिला लें। इस मिश्रण को रोजाना होठों पर लगाने से होठ सुन्दर बनते हैं और होंठों का कालापन भी दूर हो जाता है।

मुंह के छाले:
गुलाब के फूलों का काढ़ा बनाकर उससे कई बार गरारा करने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।

गुलाब के 2 फूलों को पानी में उबालें और इस पानी से कुल्ला करें। इस प्रकार से उपचार कुछ दिनों तक करने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।

गुलाब के पत्तों को चबाने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।

मुंह में छाले हो तो गुलाबजल से कुल्ला करें अथवा गुलाब के 2 फूल को 1 गिलास पानी में उबालें और इस पानी को ठण्डा करके इससे कुल्ला करें इससे लाभ मिलेगा।

पेट की गर्मी के कारण से मुंह में छाले हो जाए तो गुलाब के सूखे फूलों को रात के समय में 1 गिलास पानी में भिगने के लिए रख दें और सुबह इसे मसलकर छान लें, फिर इस पानी में 2 चम्मच चीनी मिलाकर पीयें। इस प्रकार से उपचार करने से पेट की गर्मी दूर होती है जिसके फलस्वरूप मुंह के छाले भी ठीक हो जाते हैं।

गुलाब की 10 पंखुड़ी, 3 इलायची, 5 कालीमिर्च तथा 10 ग्राम मिश्री को एक साथ पीसकर एक कप पानी में मिलाकर रखें और 4-4 घंटों के बाद इस पानी को पीएं इससे मुंह के छाले ठीक हो जाएंगे।

कान का दर्द:
गुलाब के फूलों का निकाला हुआ ताजा रस कानों में डालने से कान का दर्द ठीक होता है।

होंठों का फटना:
गुलाब के एक फूल को पीसकर उसमें थोड़ी सी मलाई मिलाकर इससे होठों पर लेप करें। आधे घंटे के बाद इसे धो लें। कुछ ही दिनों तक यह लगाने से होंठ फटेंगे नहीं और होंठों का रंग बिल्कुल गुलाब जैसा लाल हो जायेगा।

दाद:
नींबू का रस तथा गुलाब का रस बराबर मात्रा में लेकर मिला लें। इस रस को प्रतिदिन दाद पर लगाएं इससे लाभ मिलेगा।

50 ग्राम गुलाबजल में 1 नींबू का रस मिलाकर रोजाना 3 बार दाद पर लगाऐं इससे दाद ठीक हो जाता है।

दाद और मुंहासों पर गुलाब का रस लगाएं तथा 1-1 चम्मच दिन 3 बार इसे पीएं इससे दाद ठीक हो जाता है।

आंखों के रोग:
गुलाब का रस 2-2 बूंद सुबह-शाम आंखों में डालने से आंखों के रोग ठीक हो जाते हैं।

गुलाबजल आंखों में डालने से आंखों की जलन और किरकिरापन दूर हो जाता है।

50 ग्राम गुलाब जल में 1 ग्राम फिटकरी डालकर 1 से 2 बून्दे रोजाना 2 से 3 बार आंखों में डालने से आंखों के कई प्रकार के रोग जैसे- आंखें लाल होना, आंखों में कीचड़ जमना, आंखों में जलन होना आदि रोग ठीक हो जाते हैं।

अतिसार (दस्त):

10 ग्राम गुलाब के फूल और 5 ग्राम मिश्री को मिलाकर दिन में 3 बार खाएं इससे लाभ मिलेगा।

अतिसार (दस्त) होने की स्थिति में गुलाब के फूलों के बीच लगने वाले छोटे-छोटे दाने जिसे जीरा कहते हैं उसे दिन में 3 बार 1 ग्राम की मात्रा में सेवन करें।

श्वेतप्रदर:
2 चम्मच शुष्क गुलाब के फूलों का चूर्ण और 1 चम्मच मिश्री को एक साथ मिलाकर दूध के साथ रोजाना सुबह-शाम सेवन करें तथा गुलाब के ताजे पिसे हुए फूल को सोते समय योनि में रखें इससे श्वेत प्रदर में जल्दी लाभ मिलेगा।

गुलाब के फूलों को छाया में अच्छी तरह से सुखाकर बारीक पीसकर चूर्ण बना लें फिर इसमें से लगभग 3 से 5 ग्राम की मात्रा में एक दिन में सुबह और शाम (दो बार) दूध के साथ सेवन करने से श्वेत प्रदर ठीक हो जाता है।

श्वेत प्रदर रोग होने के साथ ही पेशाब में जलन हो तो ऐसी स्थिति में उपचार करने के लिए गुलाब के ताजा फूल और 50 ग्राम मिश्री दोनों को पीसकर, आधा गिलास पानी में मिलाकर रोजाना 10 दिनों तक सेवन करें इससे लाभ मिलेगा।

श्वेत प्रदर रोग में गुलाब के 10 ग्राम पत्तों को पीसकर मिश्री में मिलाकर दिन में 2-3 बार सेवन करें।

50 ग्राम गुलाब के फूलों की कोमल पंखुड़ियों में मिश्री मिलाकर खाने तथा इसके बाद दूध पीने से श्वेत प्रदर रोग में फायदा मिलता है।

प्रदर रोग:
गुलाब के ताजे फल में 50 ग्राम मिश्री पीसकर इसे आधा गिलास पानी में मिला लें और फिर इसे पी लें। इस प्रकार से सुबह और शाम रोजाना 10 दिनों तक इस प्रकार से उपचार करने पर प्रदर रोग ठीक हो जाता है।

पेट के रोग:
भोजन करने के बाद 2 चम्मच गुलकंद को रोजाना 2 बार खोन से पेट के सभी रोग ठीक हो जाते हैं।

गुलाब 5 ग्राम की मात्रा में तथा मुलहठी 5 ग्राम की मात्रा में लेकर, इसे 500 मिलीलीटर पानी में उबालकर काढ़ा बना लें फिर इसमें से 100 मिलीलीटर काढ़ा पीएं। सुबह-शाम इसका सेवन करें इससे कब्ज तथा पेट के कई प्रकार के रोग ठीक हो जाते हैं।

सौंफ का रस, पुदीने के रस तथा गुलाब के रस को मिला लें और इसमें से 4-4 बूंदों को पानी में मिलाकर सेवन करें इससे पेट के कई रोग ठीक हो जाएंगे।

खुजली:
चमेली का तेल, नींबू का रस और गुलाब का रस बराबर मात्रा में मिलाकर जहां पर खुजली हो वहां पर इसे लगाएं इससे खुजली दूर हो जाती है।

शीतपित्त:
चंदन के तेल तथा गुलाब के रस को बराबर मात्रा में मिलाकर शीतपित्त पर लगाएं इससे लाभ मिलेगा।

गुलाब के रस में थोड़ा सा चंदन का तेल मिलाकर इससे शीतपित्त पर मालिश करें इससे शीतपित्त ठीक होती है।

25 ग्राम गुलाब के जल में 25 ग्राम सिरका मिलाकर शरीर पर लगायें इससे शीत पित्त में बहुत अधिक लाभ मिलता है।

चौथाई कप गुलाबजल में एक बूंद चंदन का तेल मिलाकर इससे शरीर की मालिश करें इससे शीतपित्त ठीक हो जाती है।

पित्ती उछलने पर गुलाबजल में चंदन का पाऊडर मिलाकर लेप करने से आराम मिलता है।

सिर दर्द:
10 ग्राम गुलाब की पंखुड़ियों को 2 इलायची के साथ चबाकर खाने से सिर दर्द ठीक होता है।

गर्मी के कारण से सिर दर्द हो तथा जी मिचलाएं तो सफेद चंदन को गुलाबजल में पीसकर माथे लेप करें इससे लाभ मिलेगा।

गुलाब का इत्र माथे पर लगाने से सिर दर्द में लाभ मिलता है। गुलाबजल की 2-3 बूंद दोनों नथुने (नाक के छेद) में डालने से सिर दर्द कम होता है।

बुखार होने के साथ ही सिर दर्द हो तो 2 चम्मच गुलाबजल को इतने ही पानी मिलाकर हर 3 घंटे में 3 बार पीएं इससे सिर दर्द ठीक हो जाता है।

आधासीसी (माइग्रेन):
आधासीसी (आधे सिर का दर्द) के दर्द की अवस्था में उपचार के लिए 2 दाने इलायची, 1 चम्मच मिश्री और 10 ग्राम गुलाब की पत्तियों को पीसकर सुबह खाली पेट सेवन करें इससे लाभ मिलेगा। आधासीसी के दर्द में 1 ग्राम नौसादर को 12 ग्राम गुलाबजल में मिला लें। इस जल को रोगी के नाक में 4-5 बूंद की मात्रा में डालकर, रोगी नाक से इस दवा को अन्दर की ओर खींचने के लिए कहें इससे फायदा मिलेगा।

हैजा:
हैजे की अवस्था में आधा कप गुलाबजल में एक नींबू निचोड़कर थोड़ी सी इसमें मिश्री मिला लें और 3-3 घंटे इसे रोगी को पिलाएं इससे हैजा ठीक हो जाएगा।

सीने की जलन व जी मिचलाना:
1 कप गुलाबजल को चौथाई कप पानी में मिलाकर दिन में 2-3 बार सेवन करें इससे सीने की जलन तथा जी मिचलाने की अवस्था में आराम मिलेगा।

अम्लपित्त:
गुलाबजल में गुलाब का फूल, 1 इलायची और 1 चम्मच धनिये के चूर्ण को मिलाकर पीस लें। भोजन करने के बाद इसे सेवन करें इससे अम्लपित्त रोग में लाभ होता है।

धूप से झुलसना:
1 भाग ग्लिसरीन, आधा भाग नींबू का रस और आधा भाग सेब का रस तथा 2 भाग गुलाबजल इन सब को मिलाकर फ्रिज में रख दें। इस लेप को धूप से झुलसी हुई त्वचा पर लगाएं इससे लाभ मिलेगा।

घमौरियां, पसीना:
गर्मी के मौसम में शरीर में अलाइयां तथा घमौरियां अधिक निकलती है तथा शरीर से पसीना भी बहुत अधिक निकलता है। इस प्रकार के कष्टों को दूर करने के लिए नहाते समय 1 बाल्टी पानी में 20 बूंद गुलाबजल डालकर स्नान करें। रात को 4 चम्मच गुलाब का गुलकंद खाकर ऊपर से गर्म दूध पी लें इससे भी लाभ मिलेगा।

घमौरियां, पसीना:
पानी में गुलाबजल डालकर प्रतिदिन स्नान करें इससे त्वचा के सभी रोग ठीक हो जाते हैं तथा शारीरिक सौन्दर्य बढ़ता है और इसकी सुगंध से दिमाग को ताजगी मिलती है।

बदबूदार पसीना आना:
बदबूदार पसीना आने पर गुलाब के फूलों को पीसकर शरीर में लेप करना चाहिए तथा थोड़ी देर बाद स्नान कर लेना चाहिए इससे लाभ मिलेगा।

एक बाल्टी पानी में 10 ग्राम गुलाबजल व एक नींबू का रस निचोड़कर स्नान करें इससे शरीर की बदबू दूर होती है।

गुलाब की लाल या सफेद पंखुड़ियों के चूर्ण को शरीर पर मलने से पसीना निकलना कम हो जाता है और शरीर की बदबू भी मिट जाती है।

●▬▬▬▬▬▬♧ॐ♧▬▬▬▬▬▬●

*•🌺• 📿 📿•*

*🌺श्री स्वामी हरिदास🌺*

*•📿जै जै कुँज विहारी📿•*

*🌿🍁🌿🍁🌿🍁🌿🍁🌿🍁🌿*

🌻*श्री राधेशनन्दन जी*🌻

Leave a Reply

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s