😭रोज़ ढूँढे भी कहाँ दिल को दुखाने वाले😭

हे! ईश्वर जब तुम्हारी याद आती है तो बस यही कह पाता हूँ!!!

रोज़ ढूँढे भी कहाँ दिल को दुखाने वाले
काम आयेंगे वही दोस्त पुराने वाले

अब तो ये हाल है अपनी भी नहीं सुनते हम
अब कहाँ आप की बातों में हम आने वाले

लड़खड़ाने के सलीक़े ज़रा सीखो हमसे
रोज़ मिलते हैं कहाँ पीने पिलाने(भक्ति कीर्तन) वाले

अब जो सर दर्द बना हूँ तो शिकायत कैसी
आप ही तो थे मुझे सर पे चढ़ाने वाले

डूबने भी नहीं देते ये तेरी आँखों में
कितने ज़ालिम हैं मेरी जान बचाने (ईश्वर) वाले

अब सँभलती भी नहीं इश्क़ की ये जागीरें
कच्ची उम्रों से हैं हम दोनों कमाने वाले

इन्हीं लोगों के मुताबिक़ मैं नहीं कुछ तेरा
‘आशिक’ कहते मुझे क्यूँ हैं जमाने वाले

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