🍮🍮चाय के गुण और उससे होने वाले आयुर्वेदिक इलाज

🍮🍮चाय के गुण और उससे होने वाले आयुर्वेदिक इलाज

●▬▬▬▬▬▬♧ॐ♧▬▬▬▬▬▬●
18/01/2019

Friday : 07:26 A.M.


परिचय

चाय एक प्रकार के पेड़ की पत्ती होती है। यह बहुत प्रसिद्ध है। चाय नियमित पीने के लिए नहीं है। यह आवश्यकतानुसार पीने पर लाभदायक होती है। चाय वायु और ठंडी प्रकृति वालों के लिए हितकारी है। भूखे पेट चाय पीने से पाचन शक्ति खराब होती है तथा सोते समय चाय पीने से नींद कम आती है। चाय से स्नायुविक दर्द न्यूरेल्जिया और रक्तचाप बढ़ता है। अत: ऐसे रोगियों के लिए चाय हानिकारक होती है।
यद्यपि चाय को दवा के रूप में विभिन्न कष्टों में प्रयोग करके लाभान्वित हो सकते हैं, किन्तु फिर भी इसे दैनिक पेय के रूप में प्रयोग करने से हानियां होती हैं। चाय आजकल संसार भर में घर-घर आतिथ्य सत्कार का प्रतीक है। घर, प्रवास, खेलकूद के मैदानों, महफिलों, सेमिनारों, राजनीतिक बैठक या सम्मेलनों, कवि सम्मेलन या मुशायरा आदि किसी भी आयोजनों में देखें। सभी जगहों पर चाय का प्रवेश हो चुका है।
नियमित रूप से चाय पीने से यह बहुत अधिक नुकसान करती है। यह पाचनशक्ति को नष्ट करती है और रक्त को जलाकर शरीर को सुखा देती है। चाय बुद्धिजीवियों, मस्तिष्क से काम लेने वालों और ठंडे प्रदेश के निवासियों का पेय माना जाता है। ज्ञान तन्तुओं को यह क्षणिक उत्तेजना देती है। चाय मस्तिष्क की अपेक्षा मांस, धातु पर उत्तेजक प्रभाव डालती है। चाय पीने के बाद शारीरिक थकान कम लगती है। परन्तु अधिक चाय पीने से पाचनशक्ति खराब हो जाती है। चाय में कोई पोषक तत्व नहीं होता है। इसकी पत्तियों में प्रोटीन होता है। परन्तु चाय जिस विधि से बनाई जाती है। उस तरीके से बनी हुई चाय हानिकारक होती है।

गुण

जुखाम: यदि जुकाम, सिर दर्द, बुखार तथा खांसी ठण्ड से हो, आंख से पानी निकलता हो या पतला झागदार, श्लेष्मा (कफ, बलगम) नाक से निकलता हो तो चाय पीना लाभदायक होता है। इससे ठण्ड दूर होकर पसीना आता है तथा सर्दी में आराम मिलता है। यदि जुखाम खुश्क हो जाए, कफ गाढ़ा, पीला बदबूदार हो और सिरदर्द हो तो चाय पीना हानिकारक होता है।

पेशाब अधिक लानाः चाय पेशाब अधिक लाती है जहां पेशाब कराना ज्यादा जरूरी हो, चाय पीना लाभदायक होता है।

जलना: किसी भी तरह कोई अंग जल गया हो, झुलस गया हो तो चाय के उबलते हुए पानी को ठण्डा करके उसमें साफ कपड़ा भिगोकर जले हुए अंग पर रखें एवं पट्टी बांधे। यह पट्टी बार-बार बदलते रहें। इससे जले हुए अंगों पर फफोले नहीं पड़ते और त्वचा पर जलने का निशान भी खत्म हो जाता है।

बवासीर: चाय की पत्तियों को पानी में पीसकर गर्म करें और गर्म-गर्म पिसी हुई चाय का बवासीर पर लेप करें। इससे बवासीर का दर्द दूर हो जाता है। चाय की पत्तियों को पीसकर मलहम बना लें और इसे गर्म करके मस्सों पर लगायें। इस मलहम को लगाने से मस्से सूखकर गिरने लगते हैं।

पेचिश: चाय में पालिफिनोल तत्व पाया जाता है जो पेचिश के कीटाणुओं को नष्ट करता है। पेचिश के रोगी चाय पी सकते हैं। इससे लाभ मिलता है।

अम्लपित्त: अम्लपित्त के रोगी के लिए चाय बहुत ही हानिकारक होता है।

मोटापा दूर करना: चाय में पोदीना डालकर पीने से मोटापा कम हो जाता है।

अवसाद उदासीनता सुस्ती: पानी में चाय की पत्तियों को उबालकर इस पानी को गर्म-गर्म पीने से शरीर के अन्दर जोश आ जाता है और आलस्य या अवसाद खत्म हो जाता है। आग से जलने पर: चाय के उबले हुए पानी को ठण्डा करके किसी साफ कपड़े के टुकड़े या रूई से शरीर के जले हुए भाग पर लगाने से जलन और दर्द समाप्त हो जाता है। 10. गले में गांठ का होना: चाय की पत्तियों को उबालकर और छानकर इसके पानी से गरारे करने से भी गले में आराम मिलता है।

हानिकारक प्रभाव
अनिद्रा के रोगी तथा नशीली दवा खाने वालों के लिए चाय हानिकारक है। ऐसे रोगी यदि चाय पिये तो रोग बहुत गंभीर बन जाएगा। चाय पीने से नींद कम आती है। चाय अम्ल पित्त और परिणाम शूल वालों के लिए हानिकारक है। यह खुश्की लाती है तथा दमा पैदा करती है। भूख न लगना : चाय को ज्यादा देर तक उबालने से उसमें से टैनिन नामक रसायन निकलता है जो पेट की भीतरी दीवार पर जमा हो जाता है जिसके कारण भूख लगना बंद हो जाता है। वात : चाय पेशाब में यूरिक एसिड बढ़ाती है। यूरिक एसिड से गठिया, जोड़ों की ऐंठन बढ़ती है। अत: वात के रोगियों को चाय नहीं पीना चाहिए। चाय वीर्य को पतला करती है अत: नवयुवक इसे सोचसमझकर पीयें। चाय यकृत को कमजोर करती है तथा खून को सुखाती है। चाय त्वचा में सूखापन, खुश्की लाता है जिससे सूखी खुजली चलती है और त्वचा सख्त होती है।

विभिन्न रोगों में उपचार

चाय का विभिन्न रोगों में उपयोग :

जुखाम: यदि जुकाम, सिर दर्द, बुखार तथा खांसी ठण्ड से हो, आंख से पानी निकलता हो या पतला झागदार, श्लेष्मा (कफ, बलगम) नाक से निकलता हो तो चाय पीना लाभदायक होता है। इससे ठण्ड दूर होकर पसीना आता है तथा सर्दी में आराम मिलता है। यदि जुखाम खुश्क हो जाए, कफ गाढ़ा, पीला बदबूदार हो और सिरदर्द हो तो चाय पीना हानिकारक होता है।

पेशाब अधिक लानाः चाय पेशाब अधिक लाती है जहां पेशाब कराना ज्यादा जरूरी हो, चाय पीना लाभदायक होता है।

जलना: किसी भी तरह कोई अंग जल गया हो, झुलस गया हो तो चाय के उबलते हुए पानी को ठण्डा करके उसमें साफ कपड़ा भिगोकर जले हुए अंग पर रखें एवं पट्टी बांधे। यह पट्टी बार-बार बदलते रहें। इससे जले हुए अंगों पर फफोले नहीं पड़ते और त्वचा पर जलने का निशान भी खत्म हो जाता

बवासीर :चाय की पत्तियों को पानी में पीसकर गर्म करें और गर्म-गर्म पिसी हुई चाय का बवासीर पर लेप करें। इससे बवासीर का दर्द दूर हो जाता है
चाय की पत्तियों को पीसकर मलहम बना लें और इसे गर्म करके मस्सों पर लगायें। इस मलहम को लगाने से मस्से सूखकर गिरने लगते हैं

पेचिश: चाय में पालिफिनोल तत्व पाया जाता है जो पेचिश के कीटाणुओं को नष्ट करता है। पेचिश के रोगी चाय पी सकते हैं। इससे लाभ मिलता है

अम्लपित्त: अम्लपित्त के रोगी के लिए चाय बहुत ही हानिकारक होता है।

मोटापा दूर करना: चाय में पोदीना डालकर पीने से मोटापा कम हो जाता है।

अवसाद उदासीनता सुस्ती: पानी में चाय की पत्तियों को उबालकर इस पानी को गर्म-गर्म पीने से शरीर के अन्दर जोश आ जाता है और आलस्य या अवसाद खत्म हो जाता है।

आग से जलने पर: चाय के उबले हुए पानी को ठण्डा करके किसी साफ कपड़े के टुकड़े या रूई से शरीर के जले हुए भाग पर लगाने से जलन और दर्द समाप्त हो जाता है।

गले में गांठ का होना: चाय की पत्तियों को उबालकर और छानकर इसके पानी से गरारे करने से भी गले में आराम मिलता है।

●▬▬▬▬▬▬♧ॐ♧▬▬▬▬▬▬●

श्री राधेशनन्दन जी

Advertisements

Leave a Reply

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s