🌹*⚜मंजिल के मिलते ही सफर छूट गया⚜*🌻🌹

*(श्री राधा विजयते नमः)*

*(श्रीमत् रमणविहारिणे नमः)*

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🌻🌹*⚜मंजिल के मिलते ही सफर छूट गया⚜*🌻🌹

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मंजिल के मिलते ही सफर छूट गया
मुझसे यहीं कहीं मेरा हमसफर छूट गया

एक नयी दुनिया बनाने को चला था
जो था भी मेरा घर वो घर छूट गया

जैसे शाख से कोई पत्ता मुरझा के गिरेे
कुछ ऐसे ही तुझसे ए रहगुजर छूट गया

लगता था कि तुझसे बिछड़ेंगे न कभी
और तभी आई तिरी ख्‍ाबर छूट गया

यूं तो अरसा हुआ छूटे पर सवाल वही है
तेरे साथ चलते चलते क्‍यों मगर छूट गया

मुहब्‍बत रो रही थी अपनी वफाएं सुना कर
एक कतरा मेरी आंख से बेखबर छूट गया

पा नहीं सकते उसे अब बुला भी नहीं सकते
“राधेश” आखिर वो क्‍यों हमसे इसकदर छूट गया

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*🌺श्री स्वामी हरिदास🌺*

*•📿जै जै कुँज विहारी📿•*

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🌻*श्री राधेशनन्दन जी*🌻

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