भागवत पुराण व भागवत गीता

*(श्री राधा विजयते नमः)*

*(श्रीमत् रमणविहारिणे नमः)*

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🌻 🌹 * ⚜भागवत महापुराण व भागवत गीता⚜ *🌻🌹

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🍀🕊 🔯भागवत महापुराण व भागवत गीता🕊🍀

नारद जी की प्रेरणा से वेद व्यास जी ने श्रीमद् भागवत ग्रन्थ लिखा। श्रीमद् भागवत या भागवत महापुराण 18 विभिन्न पुराणों में से 5 वें प्रमुख पुराण हैं। इसमें 12 अलग-अलग स्कन्द ,335 अध्याय और लगभग 18,000 श्लोक शामिल हैं। अन्य पुराणों के समान, श्रीमद् भागवत ऋषि वेद व्यास द्वारा लिखे गए हैं। ऋषि शुकदेव जी, जो वेद व्यास के बेटे थे उन्होंने श्रीमद् भागवत को राजा परीक्षित को सुनाया था। राजा परीक्षित वो जिनको ऋषि श्रुंगी द्वारा 7 दिनों में तक्षक साँप द्वारा मारे जाने के लिए शाप दिया गया था।

श्रीमद् भागवत (10 वीं स्कंद) में:-

हमें श्री कृष्ण के बचपन के बारे बहुत कुछ जानने को मिलता है उनकी सम्पूर्ण बाल लीला बहुत ही अद्भुत है। कैसे उनका जन्म हुआ कैसे वो ग्वाल बाल के साथ खेले ,मक्खन चोरी लीला , गोपी के संग रस लीला को 10 वीं स्कंद में वर्णित किया गया है। इतना ही नहीं कृष्णा प्रेम की अद्भुत गाथा है इसमें भक्तो की श्री कृष्णा के प्रति समर्पण ,प्रेम को बहुत ही भक्तिमय तरीके से वेद व्यास जी ने गाया है।

ये ग्रन्थ सबसे आखरी ग्रन्थ है जिसको लिखने के बाद श्री वेद व्यास जी ने कोई और ग्रन्थ नहीं लिखा। ये इस ग्रन्थ की सबसे खास बात है।

श्रीमद् भागवत में श्री विष्णु भगवान के 24 अवतारों के बारे में बताया गया है।

जब जब धरती पे अधर्म बढ़ता है। जब जब भक्तो की पुकार उनका प्रेम अपनी चरमसीमा से आगे निकल जाता है। तो भगवान को धरती पे प्रकट होना पड़ता है। धर्म की स्थापन के लिए और भक्तो को दर्शन देने के लिए।

श्रीमद् भागवत(srimad Bhagwat) कृष्णा जी के जीवन से भरे हुए हैं। या ये कह सकते है श्रीमद् भागवत जी श्री कृष्णा का जीवन है। और श्रीमद् भागवत कृष्ण की व्यक्तिगत डायरी भी हैं।

इसमें बताया गया है कि वृंदावन प्यार की भूमि कैसे है।

क्यों पढ़ना चाहिए श्रीमद् भागवत :-

आज हमारा जीवन बहुत ही व्यस्त हो गया है। ऐसा नहीं की पहले के लोगो का जीवन व्यस्त पूर्ण नहीं था। उनके जीवन में व्यस्तता होने के साथ ही धैर्य, संतोष भी था। समय बदलता गया और हमारी जरूरते भी बदलती गयी। समय हमेशा एक जैसा नहीं रहता परिवर्तन ही नियति का नियम है। आज हम जीवन जीने का ढंग भूलते जा रहे है। श्रीमद् भागवत हमें सही जीवन जीने का ढंग सिखाती है।

श्रीमद् भागवत में इसका बहुत ही अच्छा प्रमाण मिलता है और सिख भी की। प्रेम सृष्टि का आधार है और स्वार्थ इंसान को विनाश की तरफ ले जाता है।

केवल श्वास लेना ही जीवन नहीं है कर्तव्यपूर्ण कर्म में ही जीवन है। श्रीमद् भागवत हमें बार बार मरने से बचाती है जब तक हमें जीवन का परम लक्ष्य नहीं समझ आता जो सच्चिदानन्द पूर्ण परमात्मा है। तब तक बार बार हमें जन्म लेना पड़ेगा।

श्रीमद् भागवत में से आपको शिक्षा मिलती है जब साथ छोड़ देते है जब आप अपना सब कुछ उस पूर्ण परमात्मा पर छोड़ देते है। तब श्री कृष्णा आपके कष्टों का पहाड़ उठा लेते है और आपकी रक्षा करते है।

श्रीमद् भागवत में आपके सभी प्रश्नों का जवाब है। बस वो नज़र वो समझ होनी चाहिए जो उसे समझ सके। जो उनकी कृपा से ही संभव है।🕊 …………….✍🏻

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*🌺श्री स्वामी हरिदास🌺*

*•📿जै जै कुँज विहारी📿•*

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🌻*श्री राधेशनन्दन जी*🌻

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