वो कौन है जो हमे रुलाता है?

                 *(श्री राधा विजयते नमः)*

              *(श्रीमत् रमणविहारिणे नमः)*

              

श्री शुकदेव महाराज

*●▬▬▬▬▬▬♧ॐ♧▬▬▬▬▬▬●*

     🌻🌹 वो कौन है जो हमे रुलाता है? 🌹🌻

*●▬▬▬▬▬▬♧ॐ♧▬▬▬▬▬▬●*

                                                       

🍀     *1.सुख-दुःख –  श्रीमद भागवत जी में पिता आत्मदेव को उपदेश देते समय गोकर्ण जी ने जो ज्ञान दिया है, वह बड़ा अद्भुत है. संसार में प्रत्येक प्राणी सुख की ही तलाश में है. वह चाहे पद-धन-प्रतिष्ठा या कुछ और भी हो सबके मूल में सुख की ही कामना है।

       

गोकर्ण जी कहते हैं पिताजी दो तरह के लोग ही वास्तव में सुख का अनुभव कर सकते हैं. पहला जो विरक्त है. यहाँ विरक्तता का अर्थ सब कुछ छोड़कर जंगल में चले जाना नहीं है. विरक्तता का अर्थ है किसी से किसी भी प्रकार की अपेक्षा ना रखना।

        

हमें कोई नहीं रुलाता, हमारी चाह हमें रुलाती है. हमें कोई परेशान नहीं करता हम अपनी आसक्ति और इच्छा के कारण परेशान रहते हैं. जिस दिन आसक्ति का त्याग कर दिया, फिर कोई हमें दुःखी नहीं कर सकता. आशा छोड़ कर देखो तो एक बार जिसके कारण आप बार दुःखी हो रहे हो।

2. सबका वन्दन – व्यक्ति कुछ अच्छा न कर सके कोई बात नहीं. पर किसी के कार्य में बाधक नही बनना चाहिए. भगवान के भक्त को जो कष्ट देता है या सत्कर्म के मार्ग में बाधक बनता है उससे प्रभु भी नाराज हो जाते हैं।

कभी भी इस भ्रम में नहीं रहना चाहिए कि सब कुछ मैं ही कर रहा हूँ. घर केवल तुम्हारे पुरुषार्थ से नही चलता. क्या पता किसकी कृपा, किसकी दुआ किसके भजन के प्रभाव से सब कुछ ठीक चल रहा है. किसका भजन बचा ले कुछ पता नही अतः सबका वन्दन करो,पूरे जगत को भगवद्मय दृष्टि से देखो. सियाराम मय सब जग जानी ।।✍🏻  

        *•🌺•📿📿•*

   *🌺श्री स्वामी हरिदास🌺*

       *•📿जै जै कुँज विहारी📿•*

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                   _*श्री राधेशनन्दन जी*_

*●▬▬▬▬▬▬♧ॐ♧▬▬▬▬▬▬●*

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