भगवद्भक्त श्री डूँगरजी

  
     *(श्री राधा विजयते नमः)*
              *(श्रीमत् रमणविहारिणे नमः)*
              
*●▬▬▬▬▬▬♧ॐ♧▬▬▬▬▬▬●*

🌹 *भवसागर से पार कराने वाले भगवद्भक्त*🌹
        ❗ *श्रीडूँगरजी*❗
*●▬▬▬▬▬▬♧ॐ♧▬▬▬▬▬▬●*

               
                                                   
🌿      स्वामी जी , नाभाजी के हार्दिक भाव को व्यक्त करते हुए आगे कहते कि भक्त श्रीडूँगरजी जाति से पटेल क्षत्रिय थे ।सन्त सेवा में आपकी बड़ी ही निष्ठा थी ।परन्तु आपके पिता को यह सब व्यर्थ लगता था।

🌿     अतः आप पिता से छिपाकर सन्तों को खिलाने पिलाने में धन खर्च कर दिया करते थे।इस प्रकार जब आपने बहुत सा धन व्यय कर दिया तो यह बात आपके पिता जी को भी मालूम हुई और क्रुद्ध होकर उन्होंने आपको घर से निकाल दिया।

🌿     यद्यपि आपके पास अर्थाभाव हो गया था।फिर भी आपकी सन्त सेवा बदस्तूर जारी रही ।यहाँ तक की आपने अपनी पत्नी के आभूषण तक बेंचकर उससे सन्तों की सेवा की ।
 *क्रमशः ……………* 
                          ✍🏻  

        *•🌺•📿📿•*
   *🌺श्री स्वामी हरिदास🌺*
       *•📿जै जै कुँज विहारी📿•*

*🌿🍁🌿🍁🌿🍁🌿🍁🌿🍁🌿*
                   *श्री राधेशनन्दन जी*
*●▬▬▬▬▬▬♧ॐ♧▬▬▬▬▬▬●*

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