भक्त श्री पदारथ जी

                     🦋(श्री राधा विजयते नमः)🦋
              🕊(श्रीमत् रमणविहारिणे नमः)🕊


*●▬▬▬▬▬▬♧ॐ♧▬▬▬▬▬▬●*

     🌻🌹 ❗ *श्रीपदारथजी*❗ 🌹🌻
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🍀🕊     स्वामी जी , नाभाजी के हार्दिक भाव को व्यक्त करते हुए आगे कहते कि श्री पदारथजी महाराज बड़े ही उच्च कोटि के गृहस्थ संत थे। संतों में ही नहीं अपितु संत वेष में भी आपकी बड़ी निष्ठा थी। एक बार एक ठग किसी संतसेवी वणिक के यहां संत वेष से रहने लगा। थोड़े ही दिन में वह वणिक परिवार का विश्वास पात्र बन गया ।

🕊  एक दिन मौका पाकर वह वणिक का सारा मालमत्ता लेकर चंपत हो गया। वणिक पत्नी ने जब देखा कि तिजोरी खुली है और सारा धन-संपत्ति गायब है ।तो वह चीख चीख कर रोने चिल्लाने लगी। उसका रोना चिल्लाना सुनकर राज कर्मचारियों ने ठग का पीछा किया ।जब ठग को अपने बचने का कोई उपाय ना सूझा तो वह अपने ही घर में घुस आया।

🕊 उसे राजकर्मचारियों के भय से भयभीत देखकर आपको कुछ दाल में तो काला लगा , पर सन्तवेष के प्रति निष्ठा होने के कारण उसे अपने घर में छिपा लिया।और राजकर्मचारियों के वापस चले जाने के बाद उससे सारी घटना सच सच बताने को कहा ।समस्त वस्तुस्थिति से अवगत होने पर आपने वणिक का सारा धन उसके घर भिजवा दिया और ठग को भगवान का चरणामृत एवं प्रसाद दिया । जिससे उसकी बुद्धि शुद्ध हो गई।इस प्रकार आपने अनेक कुमार्गियों को भगवद्भक्ति पथ का पथिक बना दिया।
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        *•🌺•📿📿•*
   *🌺श्री स्वामी हरिदास🌺*
       *•📿जै जै कुँज विहारी📿•*
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                   🌻*श्री राधेशनन्दन जी*🌻

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