धन साधन है साध्य नही!@

                 *(श्री राधा विजयते नमः)*

              *(श्रीमत् रमणविहारिणे नमः)*

             

 

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     🌻🌹 धन साधन है साध्य नहीं 🌹🌻

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🍀     संसार – पदार्थों में समस्या नहीं है हमारे उपयोग करने में समस्या है। कभी-कभी विष की एक अल्प मात्रा भी दवा का काम करती है और दवा की अत्याधिक मात्रा भी विष बन जाती है। विवेक से, संयम से, जगत का भोग किया जाये तो कहीं समस्या नहीं है। 


संसार का विरोध करके कोई इससे मुक्त नहीं हुआ। बोध से ही इससे ज्ञानीजनों ने पार पाया है। संसार को छोड़ना नहीं, बस समझना है। परमात्मा ने पेड़-पौधे, फल-फूल, नदी, वन, पर्वत, झरने और ना जाने क्या- क्या हमारे लिए नहीं बनाया ? हमारे सुख के लिए, हमारे आनंद के लिए ही तो सबकी रचना की है। 

संसार की निंदा करने वाला अप्रत्यक्ष में भगवान् की ही निंदा कर रहा है। किसी चित्र की निंदा चित्र की नहीं अपितु चित्रकार की ही निंदा तो मानी जाएगी। हर चीज भगवान् की है, कब, कैसे, कहाँ, क्यों और किस निमित्त उसका उपयोग करना है यह समझ में आ जाये तो जीवन को महोत्सव बनने में देर ना लगेगी।

धन-  ज्यादा पैसा, जल्दी पैसा, जितना भी हो पैसा और जीवन ही पैसा, की जीवन शैली में अब हम अपना स्वास्थ्य बेचने में लगे हैं। यूँ तो हमने धन का अम्बार लगा दिया मगर स्वास्थ्य को दाव पर लगाकर, और याद रखना वो धन किस काम का जो हमसे जीवन ही छीन ले।

आज का आदमी बड़ी नासमझी में जीवन यापन कर रहा है। आज आदमी पहले पैसा कमाने के लिए सेहत बिगड़ता है फिर सेहत बापिस पाने के लिए पैसे बिगड़ता है। स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है। 

स्वास्थ्य रहने पर आप धन अवश्य कमा सकते हैं मगर धन रहते हुए भी स्वास्थ्य नहीं कमाया जा सकता है। धन जीवन की आवश्यकता हो सकती है उद्देश्य कदापि नहीं। धन साधन है साध्य नहीं। धन अर्जित जरुर किया जाए मगर स्वास्थ्य की वलि देकर नहीं।
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   *🌺श्री स्वामी हरिदास🌺*

       *•📿जै जै कुँज विहारी📿•*

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                   🌻*श्री राधेशनन्दन जी*🌻

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