पाँच भूत

जै जै कुँज विहारी                                                                                                                    जै जै कुँज विहारी
(श्री राधा विजयते नमः)

पञ्च महाभूत की उत्पत्ति एवं उनके गुण!!!

Date:- 13/09/2018
स्वामी श्री हरिदास राधेशनन्दन जू
मानस में गोस्वामी जी ने कहा है:-
छिति जल पावक गगन समीरा। पंच रचित अति अधम सरीरा॥
पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु तथा आकाश ये पञ्च महाभूत कहलाते है जिससे ये हमारा मानव शरीर बना हुआ है।
उत्त्पत्ति:- आइये जाने की इन पञ्च तत्वों की उत्पत्ति कैसे हुई:-
पृथ्वी जल से।
जल अग्नि से।
अग्नि वायु से।
वायु आकाश से।
आकाश का प्रादुर्भाव ईश्वर से हुआ है।
अतः पंचमहाभूत ईश्वर के ही अंश है।
प्रत्येक तत्व का अपना अलग अलग गुण होता है :-
आकाश का गुण शब्द है।
वायु का गुण शब्द और स्पर्श है।
अग्नि का गुण शब्द, स्पर्श और रूप है।
जल का गुण शब्द,  स्पर्श, रूप और रस है।
पृथ्वी का गुण शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गंध है।

जब जीव किसी शरीर को धारण करता है तो वह शरीर इन्ही पञ्च महाभूतों का बना होता है जो की अपनी कर्म योनि के अनुसार सत्, राज या तम प्रवृत्ति का होता है। जीव जब अपने आप को शरीर मानकर इन पञ्च तत्वों के गुण को अपनाता है तो उसके इन्द्रियों में विकार उत्पन्न होता है और उसके दुःख का कारण बनता है और जब वह अपने शरीर का त्याग करता है तब पुनः उस शरीर के अवयव इस पञ्च महाभूत में मिल जाते है।

Leave a Reply

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s