हिन्दी का दर्द (सनातन धर्म)

जै जै कुँज विहारी                                                                                                                    जै जै कुँज विहारी
(श्री राधा विजयते नमः)
हिंदी भाषा के हृदय का दर्द

Date:- 12/09/2018
स्वामी श्री हरिदास राधेशनन्दन जू
मैं भारत से हिन्दी बोल रही हूँ

अपने ह्रदय की पीड़ा खोल रही हूँ

मेरी आवाज कोई नही यहाँ सुनता है

अंग्रेजी भाषा का जाल यहाँ बुनता है

मेरे देश में ही मेरा बुरा हाल है

विदेशी भाषा पर ठोकते ताल है

कोई नहीं करता मेरा ख्याल है

यही मेरे मन में बड़ा मलाल है

कैसे सुनाऊ मै तुमको कहानी

अपनों द्वारा मैं यहाँ सताई हूँ

मेरे दर्द को जरा तुम समझो

मैं अपने देश में बनी पराई हूँ

मेरे लहू का यहाँ बन गया पानी

कैसे कहूँ मैं अपने दर्द की कहानी

वर्ष में एक बार याद कर लेते है

जैसे कोई मेरा श्राद्ध मना लेते है

कहने को मेरा अपना विभाग है

अंग्रेजी को मिले आदर का भाग है

मैं अलग से बैठा दी जाती हूँ

अछूत बन कर  रह जाती हूँ

मेरे देश में मुझको नहीं जानते है

मुझको जरा नहीं यहाँ पहचानते है

हिंदी भाषा के किते स्वर व्यजन है

ये तक बच्चे यहाँ के नहीं जानते है

अंग्रेजी भाषा को यहाँ जानते है

उसको ही यहाँ सब पहचानते है

अंग्रेजी भाषा में कितने अक्षर है

अच्छी तरह से उनको जानते है

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