3 माँ

जै जै कुँज विहारी                                                                                                                    जै जै कुँज विहारी
(श्री राधा विजयते नमः)

(3 माँ) तीन माँ!!


Date:- 11/09/2018
स्वामी श्री हरिदास राधेशनन्दन जू
प्रत्येक जीव के जन्म से मृत्यु तक तीन तरह की अवस्था होती है-बचपन, जवानी और वृद्धावस्था। इन तीनो अवस्थाओ में तीन तरह की माँ  (माँ, महात्मा और परमात्मा) का होना आवश्यक है जो इन अवस्थाओ को सार्थक करते है:-
1 बचपन:- बचपन में हमें हमारे जन्म देने वाली माँ की आवश्यकता होती है जो की हमारा लालन पालन कर सके और हमारे बचपन को शुद्ध बना सके।
2 जवानी:- जवानी में महात्मा की आवश्यकत होती है जो की हमें संन्मार्ग की ओर प्रेरित कर हमारे आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करते है। महात्मा हमारे जीवन को बुद्ध कर देते है ताकि है संसार में धर्मानुसार कर्म कर अपनी आजीविका चला सके और साथ ही भगवान् की प्राप्ति का साधन कर सके।
3 वृद्धावस्था:- बुढापे में हमें परमात्मा की आवश्यकता होती है अर्थात हमें एकमात्र भगवत भक्ति में संलग्न हो जाना चाहिए और परमात्मा को प्राप्त करने के साधन में जुट जाना चाहिए ताकि इस जन्म मरण के चक्कर से मुक्ति पा सके और हमारा जीवन प्रबुद्ध हो सके।
अतः हमें अपने जीवन की तीन अवस्थाओ (बचपन, जवानी और बुढापा) में तीन माँ (माँ, महात्मा और परमात्मा) की आवश्यकता होती है जो हमारे जीवन को क्रमशः शुद्ध, बुद्ध और प्रबुद्ध बनाते है।

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